मीटबंदी  का असर, बदला एएमयू में थाली का मैन्यू

मीटबंदी  का असर, बदला एएमयू में थाली का मैन्यू

उत्तर प्रदेश में अवैध बूचड़खाने बंद होने से मीट की किल्लत हो गई है. जिसका असर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में भी देखने को मिल रहा है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के होस्टलों के मेस में छात्रों को हर रोज नॉन वेज खाना परोसा जाता था और अब यूनिवर्सिटी के सभी होस्टलों के मेस से नॉन वेज खाना गायब हो गया है, अब छात्र शाकाहारी खाना खाने को मजबूर हैं। यूनिवर्सिटी में यह हालात यूपी सरकार द्वारा ‘अवैध’ बूचड़खानों पर कार्रवाई के बाद पैदा हुए हैं।
 
यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर को लिखा खत:-
 
छात्रों ने यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर जमीर यू. शाह को खत लिखा है, जिसके जवाब में प्रबंधन ने कहा कि हर रोज 500 किलो गोश्त का प्रबंधन करना मुश्किल है। होस्टल के 19 डाइनिंग हॉल में नोन वेज खाना दिया जाता था। प्रबंधन ने यह भी कहा कि अलीगढ़ में कोई बूचड़खाना काम नहीं कर रहे है  और बाकी मीट बेचने वालों ने अनिश्चितकालिन हड़ताल कर रखी है, ऐसे में मीट मुहैया कराना मुश्किल है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अलीगढ़ में कुछ ‘अवैध’ बूचड़खानों को बंद कर दिया गया और बाकी के बूचड़खाने जानवरों की कमी की वजह से गोश्त मुहैया नहीं करा पा रहे हैं।
 
मीट महंगा मिला तो बढ़ सकता है डायनिंग शुल्क:-
 
मीट की कल्लित और मांग को देखते हुए उसके महंगा मिलने के आसार हैं। एएमयू को मीट महंगे दामों पर मिला तो इसका सीधा असर छात्रों और उनके अभिभावकों की जेब पर पड़ सकता है। अतिरक्ति खर्च की स्थिति में उसकी पूर्ति के लिए डायनिंग का शुल्क बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है। जब तक मीट सप्लाई सामान्य नहीं होती और रेट नहीं गिरते हर एक  छात्र से 1300 रुपये महीने तक डायनिंग शुल्क लिया जा सकता है।


-विशेष संवादाता