सरकार ने जारी किया शासनादेश, अवैध खनन की गाड़ियों को अब स्थानीय पुलिस नहीं रोकेगी

सरकार ने जारी किया शासनादेश, अवैध खनन की गाड़ियों को अब स्थानीय पुलिस नहीं रोकेगी

लखनऊ। प्रदेश में बड़े स्तर पर जारी अवैध खनन की खबरें आय दिन सुनने को मिलती रहती हैं। इसी सबके के बीच इस पर लगाम कसके के प्रयास से सरकार की ओर से शासनादेश जारी किया गया है। प्रमुख सचिव गृह अरविद कुमार की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि डायल 100 व स्थानीय थाने की पुलिस ना ही इस मामले में चेकिंग करेंगे और ना ही इस मामले में किसी भी तरह की कोई जांच करेंगे।

क्या कहा गया है शासनादेश में ?

शासनादेश में ये साफ तौर पर कहा गया है कि अगर डायल 100 मुख्यालय को इस बार में कोई जानकारी मिलती है तो वो इसकी जानकारी सर्किल ऑफिसर को देंगे ना कि डायल 100 की गाड़ी भेजेंगे। पत्र में कहा गया है कि इसकी जानकारी सीओ और एसडीएम को दी जाएगी और वो अवैध खनन के लिए बनी टास्क फोर्स की टीम के साथ मिलकर जांच और कार्रवाई करेंगे।

सुलखान सिंह ने लिखा था पत्र -

इसके साथ-साथ हर जिले के खनन अधिकारी अपने-अपने जिले में आवंटित हुए और नहीं होने वाले खनन पट्टों की जानकारी थानावार थानाध्यक्षों को देंगे। आपको बता दें, शासनादेश की जरूरत के पीछे भी बड़ी वजह है। दरअसल दिसंबर 2017 में तत्कालीन डीजीपी सुलखान सिंह ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे खनन के मामले में सीधे हस्तक्षेप ना करें। इसके साथ ही सुलखान ने इस संबंध में सरकार को पत्र भी लिखा था। पत्र में सुलखान ने लिखा था कि अवैध खनन के बारे में स्थानीय पुलिस के पास कोई विशेषज्ञता नहीं होती ऐसे में कौन सा खनन वाइड है और कौन सा अवैध है, इसको पता कर पाना उनके लिए मुश्किल है।